Header Ads Widget

Responsive Advertisement

Ticker

6/recent/ticker-posts

गुरुग्रंथ साहिब के तीन सरूप अफगानिस्तान से भारत लाया गया -

अफगानिस्तान में बिगड़े हालात के चलते सिखों के पवित्र गुरुग्रंथ साहिब की कुल १३ प्रतियां अफगानिस्तान में थी जो अब केवल ३ प्रतियाँ रह गयी  हैं। श्री गुरुग्रंथ साहिब की एक भौतिक प्रति हैं सरूप ,जिसे पंजाबी भाषा में "बीर" कहा जाता हैं। प्रत्येक बीर में १४३०  पन्ने होते हैं जिन्हें "अंग" कहा जाता हैं।  गुरुग्रंथ साहिब ६ सिख गुरुओं और अन्य लोगों द्वारा लिखित भजनों का एक प्रकार का संग्रह हैं। 

गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना और परिवहन एक सख्त आचार संहिता द्वारा नियंत्रित होता हैं जिसे '' रहत मर्यादा '' कहा जाता हैं। गुरुद्वारों में सरूप के लिए एक अलग सा विश्राम स्थल हैं जिसे  सुख आसन स्थान या "सचखंड " कहा जाता हैं जहां गुरु रात में विश्राम करते है।  

सिखों के पांचवे गुरु अर्जुनदेव ने १६०४ ईसवी में गुरुग्रंथ साहिब के प्रथम बीर को संकलित कर उसे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में स्थापित किया था। सिख समुदाय द्वारा गुरुग्रंथ साहिब के सरूप को जीवित गुरु का दर्जा दिया जाता हैं और उसी प्रकार सम्मान भी किया जाता हैं। 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ